जनपद मुरादाबाद मुरादनगर की शान मंडल प्रभारी विकास अग्रवाल
मुरादाबाद प्रसिद्ध साहित्यकार दुष्यंत कुमार ने 'कौन कहता है, आसमाँ में सुराख नहीं हो सकता , एक पत्थर ऊपर ऊछालो यारो " काव्य रचना उजाला भारद्वाज जैसे व्यक्तित्व के लिए की होगी। विलक्षण प्रतिभा के धनी उजाला भारद्वाज राज्य आदर्श शिक्षक पं.राधेश्याम शर्मा एवं सहकारी संघ की निवर्तमान अध्यक्ष विजय लक्ष्मी शर्मा की इकलौती संतान थे। प्रारम्भिक शिक्षक से परास्नातक कक्षा तक प्रथम श्रेणी प्राप्त की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़कर शिक्षक बनने हेतु डीएलएड, टीइटी करने के पश्चात बांदा जनपद में शिक्षक के रूप में चयनित हुए किन्तु सेवा में योगदान नहीं कर सके। 15 सितम्बर 2019 को सांय काल मुरादाबाद-ठाकुरद्वारा मार्ग पर मार्ग दुर्घटना में 25 वर्ष की अल्पायु में अपना शरीर त्याग दिया। अभी वैवाहिक जीवन को एक वर्ष भी पूर्ण नहीं हुआ था कि परिवार पर दुःख का पहाड़ सा टूट गया। निधन का समाचार पाकर प्रदेश के कई मंत्रीगण , क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सांसद, विधायक,शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी,पत्रकार आदि शोक व्यक्त करने पहुँचे थे । क्षेत्र की शिक्षण संस्थाओं में शोक सभायें आयोजित की गई। उल्लेखनीय है कि उजाला भारद्वाज के दादा स्व. पं. देवकी नन्दन शर्मा क्षेत्र के जाने-माने शिक्षाविद एवं ब्राह्मण समाज के सर्वमान्य प्रतिष्ठित व्यक्ति रहे हैं। अल्पायु में ही उजाला भारद्वाज आधा दर्जन शिक्षण संस्थाओं की प्रबन्ध समिति से जुड़े थे तथा स्वयं डीएन शर्मा इण्टर काॅलिज बहेड़ी ब्रह्मनान में शिक्षण कार्य कर रहे थे। इनके निधन के लगभग तीन माह पश्चात पुत्र उजवन भारद्वाज का जन्म हुआ। शिक्षा के क्षेत्र में किये गए योगदान के लिए उजाला भारद्वाज इतिहास के पन्नों में सदैव अमर रहेंगे।

