उत्तराखंड जनपद नैनीताल मुरादनगर की शान प्रदेश प्रभारी राजेश सिंघल
तकरीबन 71 प्रतिशत से अधिक वन क्षेत्र वाले उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पिछले कुछ समय में गुलदार की दहशत बढ़ गई है। राज्य के पर्वतीय इलाकों में गुलदार घात लगाकर महिलाओं, बच्चों या पालतू पशुओं को अपना शिकार बना रहा है। हालात ये हैं कि गुलदार घर में घुस कर बच्चों को उठाने से भी नहीं हिचक रहे हैं। इसके कारण ग्रामीण इलाके में बच्चे कई-कई दिन स्कूल नहीं जा पाते। कई गांव सिर्फ इसलिए खाली हो गए कि वहां रहने वाले लोग अब गुलदार का निवाला नहीं बनना चाहते।
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड के कॉर्बेट नेशनल पार्क और राजाजी नेशनल पार्क में गुलदारों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, ऐसे में भोजन-पानी की तलाश इन्हें जंगल से बाहर रिहायशी इलाकों तक ला रही है। वन विभाग विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अभी गुलदारों की संख्या करीब 3115 है, लेकिन जानकारों की मानें तो यह संख्या इससे कहीं अधिक है।
गुलदार खूंखार और चालाक होता है, जो बहुत ही चालाकी से अपना शिकार करता है। यही वजह है कि प्रदेश में मानव-वन्यजीव संघर्ष में इस वर्ष अब तक 40 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इनमें से 13 लोगों की जान गुलदार ने ली है। मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव की वजह से दोनों का ही नुकसान हो रहा है। इस दौरान 82 गुलदार भी मारे गए हैं। वन विभागऔर विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं। कुल मिलकर वर्ष 2000 से अब तक गुलदार के हमले में 514 लोगों की जान गई है, जबकि 1868 लोग घायल हुए हैं।

