मुरादनगर की शान में प्रकाशित सपेशल रिपोर्ट
अग्रवालों की 5100 सालों से भी अधिक की समृद्ध परंपरा है.. इस अवधि में कई कुल बनें और नष्ट हो गए लेकिन महालक्ष्मी के वरदान के कारण आज भी अग्रवाल हर क्षेत्र में अग्रणी हैं.. अग्रवाल वो जाति है जिसने विश्व को प्रथम मानवतावादी "एक ईंट और एक रुपये" का सिद्धान्त दिया था। जिसमें राज्य में बसने वाले प्रत्येक गरीब को बिना मांगे और बिना किसी के उपकार के इतनी धनराशि मिल जाती थी की वो अपना व्यापार चला सके और अपना घर बना सके।
अग्रवालों के कुलपिता महाराज अग्रसेन ने मात्र 16 वर्ष की आयु में महाभारत जैसे महायुद्ध में सम्मलित हुए और अपने पिता को खो देने के बाद भी युद्ध में अत्यंत पराक्रम दिखाया और भगवान श्री कृष्ण से भारतवर्ष के पुनरोत्थान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
अग्रवालों के ही आग्रेय गणराज्य और यौधेय गणसंघ ने वर्षों तक विदेशी आक्रमणकारियों को धूल चटाई और सिंकंदर जैसे विश्वविजेता तक की सेना को युद्ध में गंभीर चोट पहुंचाई। भारत का सर्वप्रथम जौहर और साका आग्रेय गणराज्य के पुरुषों और महिलाओं ने किया था।
अग्रवालों ने ही धारण गोत्रीय गुप्तवंश के रूप में भारत के सबसे शक्तिशाली और सबसे श्रेष्ठ साम्राज्य की नींव रखी। (धारण अग्रवाल जाति के अठारह गोत्रों में से एक है अन्य किसी कुल में धारण गोत्र नहीं मिलता) जिस राज्य को भारतीय शासन का स्वर्णकाल कहा जाता है जिसने भारत को सोने की चिड़िया बनाया। उन्होंने ही बौद्ध और जैन समय की कुरीतियों को दूर करके विशुद्ध वैदिक हिन्दू राज्य की नींव रखी। नालंदा और तक्षिला जैसे विश्विद्यालयों की नींव रखी और भारत को विश्वगुरु बनाया..
रोमन साम्राज्य जैसे अनेकों साम्राज्यों को निगलने वाले, विदेशी शासकों और हूणों का सामना जब अग्रवालों (स्कन्दगुप्त) से हुआ तो मानों बाजी पलट गयी और स्कन्दगुप्त ने समरांगण में अकेले अपने पराक्रम से हूणों और शासकों का सम्पूर्ण नाश किया भारत हिन्द केसरी की उपाधि पायी।
राज्य भारत में जानें जाते हैं अपने राजा के नाम से लेकिन भारत में एक ऐसा भी राज्य था जो अपने व्यापारियों की वजह से जाना जाता था। उसकी नींव किसी और ने नहीं बल्कि शेखावाटी के अग्रवालों ने रखी थी। जिस राज्य को उसके सेठों के नाम पर रामगढ़ सेठान कहा गया जो अपने समय के सबसे अमीर राज्यों में से एक था और भारत के 50% मारवाड़ी उद्योगपतियों की जन्मभूमि है।
अनेकों युद्धों की तरह भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रवालों ने क्रांतिकारियों और भामाशाह दोनों तरह की भूमिका निभाई। जहां एकओर रामजी दास गुड़वाला और लाला मटोलचंद अग्रवाल अपनी अरबों की संपत्ति क्रांतिकारियों को लुटा कर फांसी के फंदे पर चढ़े वहीं दूसरी ओर लाला झनकूमल सिंघल, लाला हुकुमचंद जैन, लाला लाजपत राय, मास्टर अमीचंद बोंबवाल आदि अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हुए।
अग्रवालों ने ही गीताप्रेस गोरखपुर, वेंकेटेश्वर प्रेस, चौखम्बा प्रकाशन जैसी धार्मिक प्रेसों की स्थापना करके वेदों, पुराणों, उपनिषदों, रामायण, महाभारत आदि ग्रंथों को प्रत्येक हिंदुओं के घर-घर पहुंचाया।
विश्व के सबसे लंबे समय तक चलने वाले रामजन्मभूमि आंदोलन को नेतृत्व, कलम और आर्थिक सहायता अग्रवालों ने ही दी। जस्टिस देवकीनंदन अग्रवाल, डालमिया जी, श्री अशोक सिंहल, हनुमान प्रसाद पोद्दार, जयभगवान गोयल, सीताराम गोयल, चम्पतराय बंसल जैसी महान् हस्तियों ने रामलला के लिए जो बलिदान दिया वो उन्हें भगवान राम का सच्चा वंशज साबित करता है। और आखिरी में अग्रवालों ने भारत वर्ष में मित्तल, जिंदल, गोयन, बजाज, डालमिया, सिंघानिया, आदि आद्योगिक घराने स्थापित करके भारत में आद्योगिक विकास में महान् क्रांति की। मोदीनगर और डालमियानगर जैसी इंडस्ट्रियल टाउनशिप की स्थापना भी अग्रवालों द्वारा की गयी है।
|| जय महाराज अग्रसेन | जय अग्रोहाधाम | जय कुलदेवी महालक्ष्मी ||

